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हल्दिबारी संवाददाता ६ घण्टा अगाडि

केंद्र सरकार की कार्यशैली पर मुख्यमंत्रियों का तीखा असंतोष: ‘अधिकार न मिलने से संघवाद पर मंडराया निराशा का साया’

विराटनगर। केंद्र सरकार की विकेंद्रीकरण विरोधी सोच और उदासीनता के कारण प्रांतीय सरकारें मजबूत नहीं हो पा रही हैं—यह गंभीर आरोप प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने लगाया है। कोशी प्रांत सरकार द्वारा विराटनगर में आयोजित ‘अंतर-प्रांतीय मुख्यमंत्री सम्मेलन’ के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्रियों ने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार, आवश्यक कानून और संसाधन हस्तांतरित करने में केंद्र सरकार लगातार टालमटोल कर रही है।

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​संविधान लागू हुए नौ साल बीत जाने के बाद भी एकल और साझा अधिकारों की सूचियों को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। मुख्यमंत्रियों ने चिंता व्यक्त की कि अधिकारों के अभाव में काम कर रही प्रांतीय सरकारों के प्रदर्शन पर सवाल उठाकर पूरी संघीय व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्रियों का स्पष्ट मानना है कि केंद्र द्वारा शक्तियों के हस्तांतरण में देरी के कारण आम जनता में संघीय व्यवस्था के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है।

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​गंडकी, बागमती, मधेश, लुंबिनी, कर्णाली और कोशी प्रांत के मुख्यमंत्रियों ने सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन करते हुए कहा कि संघीय व्यवस्था के प्रभावी कार्यान्वयन में केंद्र की केन्द्रीकृत सोच ही सबसे बड़ी बाधा है। मुख्यमंत्रियों ने कहा कि वे केवल अधिकारों की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए भी उतने ही प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, प्रांतीय सरकारों को कमजोर करके संघीय व्यवस्था कभी सफल नहीं हो सकती और प्रांतों के बिना संघवाद की कल्पना असंभव है, इसलिए समृद्धि के लिए प्रांतीय सरकारों को सशक्त बनाना ही होगा।

​पुलिस समायोजन जैसे संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित एकल अधिकार भी अभी तक प्रांतों को नहीं सौंपे गए हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और जनसेवा के मामले में जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना कठिन हो रहा है। इसके अलावा, संघीय संसद द्वारा आवश्यक केंद्रीय कानून न बनाए जाने के कारण प्रांतीय स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रांतीय सिविल सेवा और वन क्षेत्रों से संबंधित कानून बनाने और उन्हें लागू करने में भारी रुकावटें आ रही हैं।

​वित्तीय संघवाद के मामले में भी केंद्र सरकार की नीतियां उदासीन बनी हुई हैं। सीमित आंतरिक स्रोतों वाले प्रांतों को पर्याप्त अनुदान न मिलने के कारण वे आज भी पूरी तरह से केंद्र के अनुदान पर ही निर्भर रहने को मजबूर हैं।

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हल्दिबारी संवाददाता

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