जनकपुरधाम । नेपाल सरकार देश को पुनः ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित करने के मुद्दे पर तीन महीने के भीतर सभी दलों और हितधारकों के साथ परामर्श शुरू करने पर सहमत हो गई है।

जनकपुरधाम में देश के गृह मंत्री सुधन गुरुंग और धार्मिक संगठन ‘संयुक्त हिंदू मोर्चा’ के प्रतिनिधियों के बीच दो चरणों की वार्ता के बाद १३ सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहमति के साथ ही मोर्चा ने अपने सभी विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों को वापस लेने की घोषणा की है।

सुनसरी के देवानगंज में हुई घटना के बाद धनुषा सहित आसपास के क्षेत्रों में उत्पन्न तनाव को शांत करने के लिए गृह मंत्री के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल जनकपुर पहुंचा था।
समझौते के मुख्य बिंदु:
- हिंदू राष्ट्र पर परामर्श: देश में ८१ प्रतिशत से अधिक हिंदू आबादी का हवाला देते हुए, नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के विषय पर तीन महीने के भीतर समय सीमा तय कर सर्वदलीय और सर्वपक्षीय वार्ता शुरू की जाएगी।
- हथियारों और लाउडस्पीकर पर रोक: किसी भी धार्मिक उत्सव या आयोजन में घातक हथियारों के प्रदर्शन पर सख्त प्रतिबंध रहेगा। साथ ही मंदिर, मस्जिद, गुफा (गुम्बा) और चर्च जैसे धार्मिक स्थलों में लाउडस्पीकर की आवाज केवल परिसर तक ही सीमित रखनी होगी।
- धार्मिक स्थलों का पंजीकरण: सभी धार्मिक स्थलों में रहने वाले व्यक्तियों की पहचान और उनके विदेशी नागरिक होने या न होने का आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाएगा।
- नागरिकता और फंडिंग की जांच: वर्ष २००५/०६ (वि.सं. २०६२/०६३) के बाद जारी की गई नेपाली नागरिकताओं की तीन महीने के भीतर जांच की जाएगी। इसके अलावा मदरसों, मस्जिदों और अन्य धार्मिक संस्थानों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की जांच और निगरानी होगी।
- मामलों की समीक्षा और रिहाई: हालिया आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों पर दर्ज मामलों की समीक्षा कर उन्हें रिहा किया जाएगा और घायलों के इलाज की व्यवस्था सरकार करेगी।
- धार्मिक आयोगों की समीक्षा: मौजूदा धार्मिक आयोगों की उपयोगिता की समीक्षा कर उन्हें भंग करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
