काठमांडू । नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा १ रुपये के नए सिक्के से लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को समेटे हुए संशोधित ‘चुच्चे नक्शे’ (नकीले नक्शे) को हटाने का प्रस्ताव आगे बढ़ाने के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। तत्कालीन केपी शर्मा ओली नेतृत्व की सरकार के दौरान जारी किए गए इस संशोधित राजनीतिक नक्शे के स्थान पर १ रुपये के नए सिक्के पर बौद्ध मठ की तस्वीर छापने की तैयारी के बाद सरकार और केंद्रीय बैंक के इस कदम पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं ने कड़ा विरोध जताया है।

विशेष रूप से वामपंथी राजनीतिक हलकों की ओर से सरकार के इस निर्णय को राष्ट्रीय हित और भौगोलिक अखंडता के प्रतिकूल बताया जा रहा है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भीम रावल ने राष्ट्र बैंक की इस तैयारी को नेपाल की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर गंभीर आघात बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि १ रुपये के सिक्के से देश का आधिकारिक नक्शा हटाकर बौद्ध मठ की तस्वीर लगाना राष्ट्रविरोधी कदम है और इस विषय पर सरकार तथा सत्तारूढ़ दल को तुरंत अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।

दूसरी तरफ, विवाद बढ़ने के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने इसे विशुद्ध रूप से तकनीकी और व्यावहारिक बदलाव करार दिया है। राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल के अनुसार सिक्के के डिजाइन में संशोधन का मुख्य उद्देश्य इसका वजन और आकार घटाकर धातु की लागत को संतुलित करना मात्र है। नए डिजाइन के अनुसार १ रुपये के सिक्के का वजन ४ ग्राम से घटाकर ३.२ ग्राम और २ रुपये के सिक्के का वजन ५ ग्राम से घटाकर ३.८ ग्राम किया जाएगा। इसके साथ ही नए सिक्के पारंपरिक पीले रंग के बजाय स्टील के सफेद रंग में ढाले जाएंगे। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि १ रुपये के सिक्के में नक्शा बदला जा रहा है, लेकिन २ रुपये के नए सिक्के पर नेपाल का वर्तमान नक्शा (चुच्चे नक्शा) यथावत बना रहेगा।
उल्लेखनीय है कि नेपाल और भारत के बीच लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख क्षेत्र को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। १८१६ की सुगौली संधि के अनुसार महाकाली (काली) नदी को दोनों देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा माना गया है, लेकिन नदी के वास्तविक उद्गम स्थल को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। नेपाल का तर्क है कि महाकाली नदी का मुहान लिंपियाधुरा है और उसी आधार पर कालापानी तथा लिपुलेख सहित पूरा भूभाग नेपाल का ही हिस्सा है, जिसे दर्शाते हुए २०२० में नया नक्शा जारी किया गया था। वहीं भारत का कहना है कि काली नदी का उद्गम कालापानी के पास स्थित है और यह क्षेत्र प्रशासनिक रूप से उसके उत्तराखंड राज्य का हिस्सा है। चीन की सीमा से सटा होने और प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा का पैदल मार्ग होने के कारण रणनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
