भद्रपुर (झापा) — झापा जिला अदालत ने चालू वित्त वर्ष २०८२/८३ में कुल मामलों में से ६१ प्रतिशत मामलों का निपटारा किया है। अदालत ने इस वर्ष ६५ प्रतिशत मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और बाहरी बाधाओं के कारण वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रही। जिला अदालत के मुख्य न्यायाधीश उमेश प्रसाद लुइटेल के अनुसार, इस वित्त वर्ष में पिछले साल से स्थानांतरित होकर आए ३,२३२ और नए दर्ज हुए ४,३१७ मामलों को मिलाकर कुल ७,५४९ मामलों में से ४,५३५ मामलों का निपटारा कर दिया गया है। फिलहाल अदालत में ३,०१४ मामलों का अंतिम निर्णय आना बाकी है।

मुख्य न्यायाधीश लुइटेल ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष भदौ (अगस्त-सितंबर) में हुए आंदोलन के प्रभाव, उसके कारण अदालत की सूचना प्रणाली (CMS) में आई रुकावट और संघीय संसद के चुनावों जैसे कारणों से लक्ष्य के अनुसार प्रगति हासिल नहीं की जा सकी। उन्होंने बताया कि त्वरित और गुणवत्तापूर्ण न्याय प्रदान करने के लिए साल २०६१ (विक्रम संवत) से शुरू की गई रणनीतिक योजना के तहत वर्तमान में पांचवीं रणनीतिक योजना लागू है। उन्होंने निष्पक्ष, सरल और प्रभावी न्याय संपादन के लिए आगामी दिनों में भी सभी हितधारकों से समन्वय और सहयोग की अपेक्षा जताई।

अदालत के रजिस्ट्रार (श्रेस्तेदार) बिल्लीराम प्रसाईं ने जानकारी दी कि मुकदमों के बढ़ते दबाव और सीमित संसाधनों के बावजूद अदालत त्वरित, निष्पक्ष, जवाबदेह और पारदर्शी तरीके से न्याय संपादन कर रही है। कुल ९ न्यायाधीशों की दरबंदी वाले इस न्यायालय ने सेवा प्रवाह को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए मामलों की प्रकृति के आधार पर उन्हें सरल, सामान्य और विशेष श्रेणियों में वर्गीकृत कर ‘अलग मामला प्रबंधन’ (Different Case Management) पद्धति लागू की है। शाखा अधिकारी एवं सूचना अधिकारी रामचंद्र बस्नेत के अनुसार, अदालत वर्तमान में मुकदमों की सुनवाई के लिए गोला प्रथा (लॉटरी सिस्टम), स्वचालित पेशी, ऑनलाइन सुनवाई और ऑनलाइन तारीख जैसी तकनीक-अनुकूल सेवाओं का संचालन कर रही है। साथ ही, मुकदमों की कार्यवाही और फैसलों का विवरण वेबसाइट पर भी देखने की व्यवस्था की गई है।
