काठमांडू । नेपाल के प्रतिष्ठित त्रिभुवन विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम विकास केंद्र ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने वाले ११४ छात्रों के समकक्षता प्रमाणपत्र यानी इक्विवेलेंस सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन छात्रों को अपने दस्तावेजों की वैधता साबित करने के लिए ३५ दिनों का समय दिया गया था, जिसकी समय सीमा समाप्त होने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

दरअसल, भारत के सरकारी विभागों और नियामक संस्थाओं द्वारा कुछ विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक डिग्रियों को अवैध घोषित किए जाने के बाद त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया था। जांच के बाद, त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने गोरखापत्र दैनिक राष्ट्रीय समाचार पत्र में एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर संबंधित छात्रों से स्पष्टीकरण और सहायक दस्तावेज मांगे थे।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि नोटिस में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज इस बात का पर्याप्त आधार नहीं दे सके कि उनकी समकक्षता को क्यों रद्द न किया जाए। इसके मद्देनजर त्रिभुवन विश्वविद्यालय डिग्री मान्यता और समकक्षता विनियम २०८२ के नियम २१ के तहत इन प्रमाणपत्रों को अमान्य घोषित किया जाता है।
इस कार्रवाई के तहत भारत के मणिपुर राज्य में स्थित संगाई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वाले ९८ छात्रों की समकक्षता रद्द की गई है। इसके साथ ही मेघालय की सीएमजे यूनिवर्सिटी से शैक्षणिक योग्यता पाने वाले १३ छात्रों, टेक्नो ग्लोबल यूनिवर्सिटी के २ छात्रों और झारखंड की प्रज्ञान इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के १ छात्र का समकक्षता प्रमाणपत्र खारेज कर दिया गया है। इस मामले में कुछ छात्र पहले विश्वविद्यालय के संपर्क में भी आए थे, लेकिन उचित कानूनी और शैक्षणिक मापदंडों को पूरा न कर पाने के कारण अंततः उनकी डिग्रियों की मान्यता को खारिज कर दिया गया।
