बिर्तामोड (झापा)– सरकार द्वारा हाल ही में जारी की गई ‘शैक्षणिक परामर्श, भाषा शिक्षण और तैयारी कक्षा (संचालन एवं प्रबंधन) नियमावली, २०८३’ के खिलाफ झापा के शैक्षणिक परामर्श व्यवसायी (कंसल्टेंसी संचालक) आंदोलित हो गए हैं। नेपाल शैक्षणिक परामर्श संघ (इक्यान) झापा के तत्वावधान में रविवार को बिर्तामोड में व्यवसायियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर नई नीति के प्रति गंभीर असंतोष व्यक्त किया।

इक्यान झापा के कार्यालय से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शहर के विभिन्न हिस्सों का चक्कर काटते हुए मुक्ति चौक पर पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। हाथों में काली पट्टी बांधे और तख्तियां (प्लेकार्ड) लिए व्यवसायियों ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया। इससे पहले व्यवसायी दमक में भी प्रदर्शन कर चुके हैं।

२५ लाख की सिक्योरिटी डिपॉजिट और यूनिवर्सिटी इंसेंटिव पर रोक से नाराजगी
नई नियमावली में शैक्षणिक कंसल्टेंसी की स्थापना और शाखा कार्यालय खोलने के लिए २५ लाख रुपये की मुस्तैद राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) अनिवार्य की गई है। साथ ही, विदेशी विश्वविद्यालयों से किसी भी प्रकार की राशि या उपहार लेने पर रोक लगा दी गई है। इक्यान झापा के अध्यक्ष राजकुमार कार्की ने आरोप लगाया कि यह प्रावधान छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायियों को विस्थापित करने और उनके व्यवसाय को पूरी तरह बंद करने की रणनीति के तहत लाया गया है।
अध्यक्ष कार्की ने कहा, “छात्र विदेशों के कॉलेजों की फीस सीधे अपने अभिभावकों के बैंक खातों से जमा करते हैं, व्यवसायी इसमें शामिल नहीं होते। ऐसे में कॉलेजों की वित्तीय जिम्मेदारी कंसल्टेंसी संचालकों पर थोपना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।”
वहीं, इक्यान झापा के संस्थापक अध्यक्ष सुमन शर्मा जमरकटेल ने सरकार पर युवा उद्यमियों के दमन का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि पूर्वी नेपाल से शुरू हुए इस आंदोलन को कमतर न आंका जाए। उन्होंने सरकार से तुरंत इस नियमावली को वापस लेकर बातचीत का माहौल बनाने की मांग की। आंदोलन के संयोजक चिरन न्यौपाने ने भी कहा कि सरकार के इस रवैये से जनता का भरोसा टूट रहा है।
क्या है सरकार का पक्ष?
गौरतलब है कि गत आषाढ़ २४ गते को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में इस नियमावली को मंजूरी दी गई थी। सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल के अनुसार, शैक्षणिक कंसल्टेंसी वर्ष २०६८ से केवल दिशानिर्देशों (निर्देशिका) के भरोसे चल रही थीं। इस क्षेत्र को व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए नई नियमावली लाना आवश्यक था।
नए नियमों के मुताबिक, कंसल्टेंसी संचालकों को हर साल शिक्षा मंत्रालय में नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराना होगा। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में करीब १५०० कंसल्टेंसी पंजीकृत हैं, जिनमें से केवल ९२४ का ही नवीनीकरण हुआ है।
व्यवसायियों का कहना है कि वे नियमन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना किसी व्यावहारिक अध्ययन और हितधारकों से चर्चा किए बिना थोपे गए इन नियमों को वापस लिया जाना चाहिए, अन्यथा वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे।
